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संघर्ष से संन्यास और सूरज से स्वदेशानंद तक का सफर काटों भरा रहा

jantakaadhikar by jantakaadhikar
December 17, 2025
in छत्तीसगढ़
Reading Time: 1 min read
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संघर्ष से संन्यास और सूरज से स्वदेशानंद तक का सफर काटों भरा रहा
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( कहते हैं संघर्ष का दूसरा नाम सूरज है ) कन्हैया के घर आठवें संतान के रूप में गरीब ब्रम्हे परिवार में सूर्य उदय के समय जन्मे सूरज ब्रम्हे का बड़े ही लाड प्यार से पालन पोषण हुआ। पिता छोटी सी सरकारी नौकरी में थे । जिससे दस बच्चों का पालन पोषण बहुत ही कष्ट दायक था। घर की परेशानी देखकर 10 वर्ष की उम्र में पिता का सहारा बनने सूरज ब्रम्हे ने काम करना शुरू किया। पढ़ाई के साथ साथ बाजारों में छोटी छोटी दुकानें लगाकर अपनी और अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करते रहे। ये बचपन से ही शाखा जाया करते थे। इन्हे पहलवानी करना और समाज सेवा, लठ चलाना, तलवार चलाना, कुस्ती लड़ना, दौड़ना, तैरना , दूसरों की सेवा करने का बचपन से ही शौक था। शाखा के साथ साथ ये 10 वर्ष की उम्र से ही अपने अखाड़े के गुरु मो. बशीर के शानिध्य में हनुमान व्यायाम शाला जाने लगे। सूरज ब्रम्हे प्राथमिक शाला में शाला नायक रहे, मिडिल स्कूल में शाला नायक रहे, हायस्कुल में शाला नायक रहे, हनुमान व्यायाम शाला के प्रथम अध्यक्ष रहे। जब बजरंग दल का गठन हुआ तब ये बालाघाट जिले के प्रथम बजरंगदल अध्यक्ष रहे। सन 1975 के अमजेंशी के पश्चात 1980 में जब सभी दल वालों ने मिलकर तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी के अत्याचार के विरुद्ध जब भारत बन्द करवाए तो सूरज ब्रम्हे के नेतृत्व में बैहर बन्द किया गया था। तो इन्हें पैट्रोल पम्प से उठाकर बालाघाट जेल में डाल दिया गया था उस समय इनकी उम्र महज 14 वर्ष की थी। और ये अपनी राजनीति की शुरुआत कामयूनिष्ट पार्टी से किए थे और इन्हे किसी आन्दोलन करने के कारण पहली बार जेल जाना पड़ा था । इनकी उम्र कम होने के कारण इन्हें सिवनी जेल पहुंचाने की तैयारी कर ली गई थी किन्तु बालाघाट जनता पार्टी के तत्कालीन नेता पुराण कुमार अडवाणी इनको सिवनी जेल ले जाने का विरोध कर धरने पर बैठ गए थे। उस समय बालाघाट जिले के आठ नेता जेल गए थे जिनमे क्रांतिकारी नेता कंकर मुंजारे ( बालाघाट ) , कामयुनिष्ठ पार्टी के नेता रामप्रसाद पाठक ( लालबर्रा ), जनता पार्टी के नेता पुराण कुमार अडवाणी ( बालाघाट ) , जनता पार्टी के नेता दिलीप भटेरे ( लांजी ), कामयुनिष्ठ नेता शुक्ला जी ( बालाघाट ) , कामयुनिष्ठ नेता फारूक खान ( कटंगी ), और बैहर बजरंगदल अध्यक्ष सूरज ब्रम्हे ( बैहर ) ऐसे नेता जिले के जेल में डाल दिए गए थे। किन्तु तत्कालीन मुख्य मंत्री के आदेश से दूसरे दिन सभी को बिना शर्त के छोड़ दिया गया था। उसके पश्चात सूरज ब्रम्हे के संघर्ष का दौर प्रारम्भ हुआ। अर्जुन सिंह से लेकर दिग्विजय सिंह तक जब तक कांग्रेस का कार्यकाल रहा तब तक सूरज ब्रम्हे के द्वारा अनेकों आन्दोलन प्रदर्शन किया गया। कभी भ्रष्टाचार को लेकर, तो कभी भू माफियों के विरुद्ध तो कभी जंगल माफियों के विरुद्ध तो कभी सट्टा के विरुद्ध तो कभी खनिज माफिया के विरुद्ध तो कभी क्षेत्र की जन समस्याओं को लेकर अनेकों आन्दोलन किए गए। आन्दोलन प्रदर्शन के कारण इन्हें अनेकों बार जेल की हवा भी खानी पड़ी किन्तु ये अपने रास्ते में डटे रहे। अनेकों कठिनाइयां भी झेली। कांग्रेस नेताओ के द्वारा इनको बहुत परेशान किया गया। ये हर दस दिन पन्द्रह दिनों में एस. डी. एम. कार्यालय बैहर के सामने धरने में बैठे रहते थे। तो कभी जन समस्याओं को लेकर रैली निकालते। इनके द्वारा बैहर के अलावा बालाघाट, सिवनी, जबलपुर भोपाल तथा दिल्ली में भी आन्दोलन प्रदर्शन किए गए। ये बचपन से ही बजरंग बली के भक्त रहे। 10 वर्ष की उम्र ही हनुमान चालीसा का पाठ करते आ रहें हैं। इनका मानना है की इनको हर संकट से बजरंगबली निकालते हैं। इनके द्वारा जब मध्यप्रदेश में दिग्विजय सिंह की सरकार थी उस समय इन्होंने अपने साथियों के साथ सर में कफन बांध कर लकड़ी की चिता पर बैठकर 12 दिनों का आमरण अनशन किया गया था। जब इनकी मांगे पूरी नहीं होने लगी तो इन्होंने चिता में आग लगाकर जलती चिता में कूद गए थे जिससे इनके कुर्ते आग में जल गए थे। किंतु इन्हे वहां तैनात पुलिस कर्मियों ने बचाया था। अनशन की वजह से ये और इनके साथी बीमार पड़ गए थे। जिससे इन्हे बैहर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। तब तत्कालीन सरकार ने केबिनेट में प्रस्ताव पास कर प्रदेश के सभी गरीबों झुग्गी वासियों को राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत बैहर में भी झुग्गी झोपड़ी में निवासरत को तत्कालीन वन मंत्री लिखीराम कावरे एवम् अनुसूचित जाति जनजाति मंत्री गणपत सिंह उइके ने बैहर टाउन हॉल में पहुंच कर पट्टा वितरण किया था। इसके पश्चात भी सूरज ब्रम्हे के द्वारा बैहर क्षेत्र के विकास एवम् क्षेत्र की जनता के हित में अनेकों जन आन्दोलन प्रदर्शन किया गया जिससे क्षेत्र की जनता के हित में क्षेत्र का विकास हुआ। सूरज ब्रम्हे को विरासत में संघर्ष मिला था उनके दादा बरबद प्रसाद पांड्या (ब्रम्हे ) भी 1942 में भारत छोड़ो आन्दोलन में बैहर में अन्दोलन का नेतृत्व किये थे और उस समय के तत्कालीन अंग्रेज तहसीलदार के द्वारा हिंदुस्तानियों को गाली गलौच करने पर उसी के पिस्टल से उस तहसीलदार को गोली मारने के कारण आज तक सूरज ब्रम्हे के दादा बरबद प्रसाद पांड्या का अता पता नही है कि अंग्रेजों ने सूरज ब्रम्हे के दादा को कहां लेजाकर फांसी दी गई या उनके साथ क्या किया गया आज तक पता नही है। घटना के पश्चात अंग्रेजों द्वारा सूरज ब्रम्हे के पिता उस समय 17 वर्ष के थे उन्हें और उनके परिवार को परेशान करने लगे जिससे वे बैहर छोड़कर खुरई चले गए और वहां मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण करते रहे। देश आजादी के 10 वर्ष पश्चात खुरई से वापस आकर बालाघाट मानेगांव में रहे। फिर मानेगांव से बैहर आकार रहने लगे । बैहर में ही 1964 में सूरज ब्रम्हे ( स्वामी स्वदेशानन्द ब्रह्म गिरि महाराज ) का जन्म हुआ। सूरज ब्रम्हे अनेकों सामाजिक संगठन में काम किए साथ ही वे अपने समाज के निर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। बैहर नगर परिषद के पार्षद रहे। भारतीय जनता पार्टी पिछड़ा वर्ग मोर्चा में प्रदेश में विशेष आमंत्रित सदस्य रहे। किसान मोर्चा के प्रदेश कार्यकारणी सदस्य रहे। भारत सरकार के रेल सलाहकार समिति में सदस्य रहे। दूर संचार सलाहकार समिति में भारत सरकार के सदस्य रहे। बालाघाट जिले के बजरंगदल के प्रथम अध्यक्ष रहे। आर. एस. एस. का तीनों वर्ग किए इसलिए हिंदुत्व की भावना उनमें कूट कूट कर भरी हुई है। इनके द्वारा दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल में बैहर में पानी की समस्या को लेकर सकोली मटका रेली निकाल कर साकौली में दिग्विजय सिंह का पुतला लेटाकर पूरे बैहर शहर में “राम नाम सत्य है ,दिग्विजय तेरा गत्य है” के नारे के साथ महिलाओं के सर में मटका रखकर बैहर बस स्टैंड पहुंच कर बस स्टैंड में जन सभा किया गया था। कांग्रेस का कार्यकाल सूरज ब्रम्हे के लिए काटो भरा रहा। जब भारत में सरपंच से लेकर प्रधानमंत्री कांग्रेस के हुआ करते थे उस समय श्री ब्रह्म के द्वारा कांग्रेस के अत्याचार और भ्रष्टाचार को लेकर अनेकों आन्दोलन प्रदर्शन किए गए जिसे जिला और प्रदेश की जनता जानती है। कांग्रेस के कार्यकाल में जब इनके द्वारा सुबह प्रभात फेरी निकाली जाती थी तो उनके ऊपर अपराध पंजीबद्ध किया गया। उसके पश्चात भी ये अपने कार्य में अडिग रहे और निडरता से अपने कार्य को अंजाम देते रहे। जब मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे उस समय गोधरा काण्ड हुआ था। गोधरा कांड के पश्चात 22 जून 2004 को नरेन्द्र मोदी विचार मंच का गठन किया गया। उस संगठन में सूरज ब्रम्हे को पहली नियुक्ति जिला सह संयोजक के पद पर किया गया था । जिला सह संयोजक से प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय संयोजक, एवम् राष्ट्रीय मुख्य संगठन महामंत्री बनाया गया। जब इनके द्वारा चित्रकूट में सन्त समागम का सफल कार्यक्रम किया गया तब इन्हे अंतर्राष्ट्रीय सन्त बौद्धिक मंच का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया। सूरज ब्रम्हे के द्वारा बैहर को जिला बनाने के लिया लगभग 30 वर्षों से संघर्ष किया जा रहा है। बैहर को जिला बनाने अनेकों आन्दोलन धरना प्रदर्शन किए गए हैं। अनेकों बार बैहर, बिरसा और परसवाड़ा को सम्पूर्ण रूप से बन्द कराया गया है। किन्तु कुछ स्वार्थी नेताओं के कारण बैहर जिला नही बन पा रहा है। उनका मानना है कि बैहर आज नहीं तो कल जिला बनेगा जिसके लिए वे हमेशा संघर्ष करते रहेगें। इनका लगाव हमेशा चित्रकूट में लगा रहा और प्रभु श्री राम का इन पर आशीर्वाद रहा की ये हमेशा चित्रकूट आने जाने लगे जिससे इनका लगाव चित्रकूट में लगने लगा इनको लगा की अब प्रभु के श्रीचरणों में चला जाना चाहिए और उन्होंने अनुसुइया धाम के महाराज श्री श्री 1008 श्री राम शिरोमणि लल्ली महाराज के मार्गदर्शन में सन्यास धारण कर लिया और भगवा धारण कर लिया। इनके द्वारा राजस्थान जिला खैरथल तहसील मुंडावर के बाबा प्रहलाद दास आश्रम के महन्त बलकानंद गिरि महाराज से दीक्षा लेकर पूर्ण रूप से सन्यास धारण कर लिया। सन्यास धारण करने के पश्चात इनका एक ही लक्ष्य रहा की पूरे विश्व में घूमकर सभी सनातनियों को एक मंच पर लाकर भारत को पुनः अखण्ड भारत बनाना है जिसके लिए ये अंतर्राष्ट्रीय सन्त बौद्धिक मंच के माध्यम से भारत सरकार और नेपाल सरकार से मांग कर रहें हैं की भारत और नेपाल को हिन्दू राष्ट्र बनाया जाए और नेपाल तथा भारत में गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिया जाए। साथ ही साधु सन्तों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाया जाए ऐसे ग्यारह सूत्रीय मांगों को लेकर इनके द्वारा देश और विदेश का भ्रमण किया जा रहा है। आज देश के हर प्रदेशों में हर जिलों में संगठन काम कर रहा है। संगठन का लक्ष्य 2030 तक 25 करोड़ सदस्य बनाने का है। जिसे पूरा करने के लिए रात और दिन एक करके पूरे देश में भ्रमण किया जा रहा है। संगठन संतों को संसद तक पहुंचाकर सन्त संसद की स्थापना करना चाहता है। जिसके लिए सभी सन्तों को एक मंच पर लाया जा रहा है। आज संगठन भारत के अलावा नेपाल, भूटान, इंडोनेशिया, अमेरिका, यू ए ई एवम् अन्य देशों में भी काम कर रहा है। 2030 के पहले संगठन विश्व के सभी देशों में भगवा लहराने में सफल हो जायेगा। धीरे धीरे सभी देशों का झुकाव सनातन के प्रति होता जा रहा है।

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